NCERT Solutions for Class 10 Hindi Path-6: Netaji Ka Chashma
'नेताजी का चश्मा' स्वयं प्रकाश द्वारा रचित एक मार्मिक कहानी है, जिसमें एक छोटे कस्बे में स्थापित नेताजी सुभाषचंद्र बोस की मूर्ति और उस पर चश्मा लगाने वाले कैप्टन चश्मेवाले की देशभक्ति का हृदयस्पर्शी चित्रण किया गया है।
पाठ का सार एवं मुख्य बिंदु
पाठ्यपुस्तक के महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर
प्रश्न: हालदार साहब को नेताजी की मूर्ति में क्या कमी हमेशा खटकती थी?
उत्तर: हालदार साहब को नेताजी सुभाषचंद्र बोस की संगमरमर की मूर्ति में हमेशा यह कमी खटकती थी कि मूर्ति पर चश्मा नहीं लगा होता था, जिसके कारण मूर्ति अधूरी और फीकी सी प्रतीत होती थी।
प्रश्न: कैप्टन चश्मेवाला कौन था और वह मूर्ति के लिए क्या करता था?
उत्तर: कैप्टन चश्मेवाला एक गरीब, देशभक्त फेरीवाला था, जो अपनी टूटी-फूटी दुकान पर चश्मे बेचता था। वह नियमित रूप से नेताजी की मूर्ति पर सस्ते फ्रेम का एक चश्मा लगा देता था, ताकि मूर्ति की गरिमा बनी रहे, भले ही असली चश्मा हमेशा जल्दी टूट या चोरी हो जाता।
प्रश्न: मूर्ति पर बार-बार चश्मा बदलते रहने का क्या प्रतीकात्मक महत्व है?
उत्तर: यह कैप्टन की निश्छल और निःस्वार्थ देशभक्ति का प्रतीक है — बिना किसी प्रतिफल की अपेक्षा किए वह नेताजी के सम्मान के लिए निरंतर प्रयासरत रहता है, जो दर्शाता है कि सच्ची देशभक्ति दिखावे की नहीं बल्कि सच्चे समर्पण की भावना है।
प्रश्न: लेखक इस कहानी के माध्यम से क्या संदेश देना चाहते हैं?
उत्तर: लेखक यह संदेश देना चाहते हैं कि देशभक्ति किसी बड़े या दिखावटी कार्य में नहीं, बल्कि छोटे-छोटे निःस्वार्थ प्रयासों में भी झलकती है, तथा साधारण से साधारण व्यक्ति भी अपने ढंग से राष्ट्र के प्रति सच्चा सम्मान प्रकट कर सकता है।